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तुलसी एक द्विबीजपत्री पौधा है| इसकी पत्तियों में एक ख़ास सुगंध होती है| आयुर्वेद में इस पौधे का ख़ास महत्त्व है| सर्दी-खांसी, दांतों के रोग, श्वास सम्बन्धी रोग के लिए यह अति लाभकारी माना जाता है| भारतीय संस्कृति में तुलसी को पूजनीय माना गया है| इसके सांस्कृतिक महत्व का आकलन इस दृष्टि से भी किया जा सकता है कि पुराने जमाने में हर घर के आँगन में तुलसी चौरा हुआ करता था| इस तुलसी चौरे पर प्रतिदिन गृहणियां जल चढ़ाती थी और संध्या काल में दीपक लगाती थीं| आज भी ग्रामीण अंचल में अथवा शहरों में भी जहां थोड़ी सी भी जगह हो लोग तुलसी अवश्य लगाते हैं|

तुलसी से वशीकरण मंत्र

तुलसी के दो प्रकार होते हैं- रामा तथा श्यामा| रामा तुलसी के पत्तों का रंग हल्का होता है इसलिए इसे गौरी तुलसी भी कहा जाता है| जबकि श्यामा तुलसी का रंग गहरा होता है| इसमें कफ नाशक गुण होता है|

तुलसी के बीज के टोटके/उपाय

धार्मिक व औषधीय गुणों के अतिरिक्त तुलसी से कई टोटके भी किये जाते हैं| इसके पत्तों को संजीवनी कहा जाता है वहीँ इसके बीजों का उपयोग इन टोटकों के लिए किया जा सकता है| जीवन की छोटी-छोटी समस्याएं जो दुःख का कारण बन जाती हैं| इन टोटकों से दूर किया जा सकता है|

अगर दफ्तर में किसी सहकर्मी, बॉस से परेशान हो, नौकरी में समस्या हो तो दफ्तर में किसी खाली जमीन पर जहां थोड़ी सी भी मिटटी हो वहाँ सफेद साफ़ कपडे में तुलसी के सोलह बीज लेकर बाँध लें और उस पोटली को सोमवार के दिन भूमि के भीतर दबा दें| ऐसा करने से दफ्तर में आपके खिलाफ चल रही साजिशो पर भी विराम लग जाएगा|

यदि कोई ऐसी मनोकामना हो जो अनेक प्रयासों के बाद भी पूरी न होती हो तो शुक्रवार के दिन सुबह स्नान ध्यान के बाद बिना अन्न ग्रहण किये थोड़ी सी तुलसी के बीज, एक लौंग, एक साबुत सुपारी और एक इलायची लेकर नए लाल कपडे में बाँध लें| अब देवी लक्ष्मी के सम्मुख देसी घी से दीपक जलाएं| सभी सामग्रियों की पोटली वहीँ रखें| पंचोपचार विधि से पूजन करें| लक्ष्मी जी के स्त्रोत्र का पाठ करें| अंत में आरती करें| शुक्रवार के दिन समस्त सामग्री वही पडा रहने दें| शनिवार के दिन सुबह सुबह नित्य क्रिया से निवृत्ति होने के बाद स्नानादि संपन्न करने के बाद सभी सामग्रियों को हनुमान मंदिर लेकर जाएं| वहाँ भी देशी घी का दीपक जलाएं| हनुमान चालीसा का पाठ करें| सामग्री वही छोड़ दें| संध्या कला में पुनः मंदिर जाएँ, हनुमान चालीसा का पाठ करें, हनुमान जी की आरती करें और वह सामग्री किसी ताबीज की भांति अपनी भुजा पर बाँध लें| कम से कम चार महीने तक उसे पहने| इसी बीच परिणाम प्राप्त होता है| कभी कभी ज्यादा समय भी लग सकता है| इस दौरान जीवन सात्विक रखना जरुरी है| मांस मदिरा तथा समस्त बुरी लतों से दूर रहें|

तुलसी के पत्ते से वशीकरण

तुलसी के कई गुणों में एक गुण वशीकरण भी है| इसकी सहायता से किये गए प्रयोग कभी असफल नहीं होते हैं| वशीकरण के कई तरीके हैं| इनमें से तुलसी द्वारा किया गया वशीकरण अत्यंत प्रभावशाली माना गया है|

अगर किसी व्यक्ति का वशीकरण करना हो तो तुलसी के पत्ते पर सिन्दूर या कुमकुम से उस व्यक्ति का नाम लिख दें| अब तुलसी के पत्ते को अपने हाथ में लेकर नीचे लिखे मंत्र का जाप करें –

ॐ त्रिपुराय विद्महे तुलसीपत्राय धीमहि |तन्नो: तुलसी प्रचोदयात

इस मंत्र का एक सौ इक्यावन बार जाप करना है| जाप पूर्ण होने के पश्चात तीन बार उस पत्ते पर फूंक मारे| अब यह अभिमंत्रित हो गया| इसके बाद प्रतीक्षा करें| आपको निश्चित रूप से उस व्यक्ति का फोन अथवा सन्देश आएगा| ऐसा होते ही उस पत्ते को किसी साफ़ बहते हुए जल में बहा दें|

तुलसीके पत्तों की सहायता से वशीकरण की एक और विधि है| इसके अनुसार गुरूवार के दिन ब्रम्ह मुहूर्त में जग जाएं| स्नान करके २ तुलसी के पत्ते तोड़ लें| यहाँ ध्यान रखने की जरुरत है कि पत्ते साबुत हो, कटे-फटे कहीं से न हों| अब इन्हें गाय के कच्चे दूध (बिना उबले हुए) में धो लें| इसके बाद एक पत्ते पर रक्त चन्दन से अपना नाम लिखें तथा दूसरे पत्ते पर उस व्यक्ति का नाम लिखें जिसका वशीकरण करना है| इसके बाद उत्तर दिशा की ओर मुख करके किसी आसन पर बैठ जाएं| आसन कुश का हो तो उत्तम अन्यथा किसी भी लाल आसन का उपयोग किया जा सकता है| इसके बाद दोनों पत्ते अपने दाहिने हाथ में रखे और नीचे लिखे मंत्र का एक सौ इक्यावन जाप करें – ओम नमो आदि रुपाय, वशे कुरु कुरु स्वाहा| जाप संपन्न होने के बाद एक तुलसी का पत्ता अपने जिह्वा के ऊपर रख ले और दूसरा जिह्वा के नीचे| अब मन ही मन जिस इंसान को वश में करना हो उसका नाम ग्यारह बार लें| तत्पश्चात दोनों पत्ते जमीन पर थूक दें और भूमि के नीचे दबा दें| यह काम उसी समय करना है| वह व्यक्ति आपके सम्मोहन में आ जाएगा|

किसी भी तांत्रिक प्रयोग की सलाह देने से पूर्व अथवा पश्चात यह चेतावनी देना जरुरी हो जाता है कि इनका प्रयोग किसी का अहित करने के लिए, किसी युवती को सम्मोहित कर उसके साथ यौनाचार करने के लिए अथवा दुश्मनी साधने के लिए न करें| ब्योम में कई उर्जाएं घुमती हैं| इन टोटकों अथवा मंत्र के द्वारा उन्हों को सकरात्मक धारा में मोड़ा जाता है ताकि कामना सिद्ध हो सके| कई बड़े-बड़े साधको ने मात्र जन कल्याण की भावना से इन्हें सिद्ध किया| कुछ गैर जिम्मेदार लोग इसका दुरूपयोग करते हैं, यह जाने समझे बगैर कि इसका दूर गामी परिणाम कितना भयंकर हो सकता है|

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