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वैदिक ज्योतिष के अनुसार मनुष्य के भाग्य को सबसे अधिक प्रभावित उसकी कुंडली में मौजूद ग्रह करते हैं। अगर कुंडली में कोई भी ग्रह अशुभ हो तो वह जातक को सफल होने से रोक सकता है। ऐसी स्थिति में सबसे बेहतरीन उपाय ग्रहों की शांति हेतु पूजा करवाना होता है। इन दिनों ग्रहों को शांत कराने हेतु पूजा में नवग्रह यंत्र (Navgrah Yantra in Hindi) का प्रयोग बढ़ गया है।

नवग्रह यंत्र का उपयोग (How to Use Navgrah Yantra)

नवग्रह यंत्र को नवग्रह शांति यंत्र के नाम से भी जाना जाता है। इस यंत्र (Navgrah Shanti Yantra) के माध्यम से सभी ग्रहों का एक साथ विधिवत पूजन हो जाता है। नवग्रह शांति यंत्र को लाल रंग की पृष्ठ पर चमकीले या स्वर्ण स्याही से बनाना उचित माना जाता है। इसकी स्थापना अगर नवरात्रों के दिनों में की जाए तो यह और भी अधिक फल देता है।

नवग्रह यंत्र की स्थापना करने के लिए पहले एक आसान बनाकर उसपर यंत्र को रखना चाहिए। यंत्र पर फूल, पंच द्रव्य, गंगा जल आदि छिड़कना चाहिए। इसके बाद पूजा कर प्रत्येक ग्रह के मंत्रों का जाप करना चाहिए। मंत्र जाप के बाद यंत्र शुद्धि समाप्त हो जाती है। प्रतिदिन धूप और पूजा करने से यंत्र का प्रभाव अधिक दिखाई देता है।

नवग्रह यंत्र की स्थापना व प्रभाव (Installation & Effects of Navgrah Yantra)

नवग्रह यंत्र की स्थापना उसी स्थिति में करनी चाहिए जब ग्रह अशांत हों। इस यंत्र की स्थापना व पूजन करने से सभी ग्रह के दुष्प्रभावों को खत्म करता है। जीवन में समृद्धि, प्रसन्नता का आगमन होता है, जिससे मनुष्य अपने जीवन में सफलता प्राप्त करता है। इस यंत्र की स्थापना शुद्धिपूर्वक, विशेष पूजन-विधि द्वारा की जाती है। इस यंत्र की सिद्धि के लिए ज्योतिष मार्गदर्शन बहुत जरूरी है।

नोट: नवग्रह शांति यंत्र के प्रयोग को लेकर कई मतभेद हैं. जहां एक और कुछ पंडित इसे बेहद उपयोगी मानते हैं तो वहीं कुछ इसे हानिकारक बताते हैं.

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