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यंत्र को सबसे महान और सर्वाधिक फल देने वाला यंत्र माना जाता है। कई लोग श्री यंत्र को लक्ष्मी यंत्र भी मानते हैं। धार्मिक मान्यतानुसार श्री यंत्र के पूजन से धन आगमन के रास्ते खुलते हैं।

श्री यंत्र का उपयोग (How to Use Shree Yantra)

श्री यंत्र की पूजा के लिए लक्ष्मी जी के बीज मंत्र "ऊं श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ऊं महालक्ष्मै नम:" का प्रयोग करें।

श्री यंत्र की आराध्या देवी श्री त्रिपुरा सुन्दरी देवी मानी जाती हैं। पौष मास की सक्रांति के दिन और वह भी रविवार को बना हुआ श्री यंत्र बेहद अद्भुत व सर्वोच्च फल देने वाला होता है, लेकिन ऐसा ना होने पर आप किसी भी माह की संक्रांति के दिन या शुक्ल पक्ष की अष्टमी के दिन इस यंत्र का निर्माण कर सकते हैं। यह यंत्र ताम्रपत्र (तांबे की प्लेट), रजत-पत्र या स्वर्ण-पत्र पर ही बना होना चाहिए।

श्री यंत्र की स्थापना व प्रभाव (Installation & Effects of Shree Yantra)

श्री यंत्र को प्रतिष्ठित करने से पहले सुयोग्य ज्योतिष या पुरोहित की सलाह अवश्य लें। वशीकरण यंत्र की स्थापना शुद्धिपूर्वक विशेष पूजन द्वारा किया जाता है। इस यंत्र को स्थापित कर, विधिवत रूप से पूजन करने से समस्त चिंताओं को समाप्त करता है। जिसके फलस्वरूप, सकारात्मक ऊर्जा का विकास होगा तथा समृद्धि प्राप्त होगी।

नोट: श्रीयंत्र एक बेहद प्रभावी यंत्र है, अगर इसका पूर्ण लाभ उठाना हो तो इसकी स्थापना एक सुयोग्य पंडित से ही कराएं

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