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ज्योतिषशास्त्री कहते हैं शनि की साढ़े साती के समय कुछ विशेष प्रकार की घटनाएं होती हैं जिनसे संकेत मिलता है कि साढ़े साती चल रही है। शनि की साढ़े साती के समय आमतौर पर इस प्रकार की घटनाएं होती है जैसे घर कोई भाग अचानक गिर जाता है। घ्रर के अधिकांश सदस्य बीमार रहते हैं, घर में अचानक अग लग जाती है, आपको बार-बार अपमानित होना पड़ता है। घर की महिलाएं अक्सर बीमार रहती हैं, एक परेशानी से आप जैसे ही निकलते हैं दूसरी परेशानी सिर उठाए खड़ी रहती है। व्यापार एवं व्यवसाय में असफलता और नुकसान होता है। घर में मांसाहार एवं मादक पदार्थों के प्रति लोगों का रूझान काफी बढ़ जाता है। घर में आये दिन कलह होने लगता है। अकारण ही आपके ऊपर कलंक या इल्ज़ाम लगता है। आंख व कान में तकलीफ महसूस होती है एवं आपके घर से चप्पल जूते गायब होने लगते हैं।

आपके जीवन में जब उपरोक्त घटनाएं दिखने लगे तो आपको समझ लेना चाहिए कि आप साढ़े साती से पीड़ित हैं। इस स्थिति के आने पर आपको शनि देव के कोप से बचने हेतु आवश्यक उपाय करना चाहिए। ज्योतिषाचार्य साढ़े साती के प्रभाव से बचने हेतु कई उपाय बताते हैं आप अपनी सुविधा एवं क्षमता के आधार पर इन उपायों से लाभ प्राप्त कर सकते हैं। आप साढ़े साती के दुष्प्रभाव से बचने क लिए जिन उपायों को आज़मा सकते हैं वे निम्न हैं:

1. शनि की साढ़े के दुष्प्रभावों को दूर करने के लिए नित्य हनुमान चालीसा एवं बजरंग बाण का पाठ करना चाहिए।

2. शनिवार के दिन नंगे पैर हनुमान मंदिर जाएॅ और वहाँ पर जाकर अपने माथे पर उनके चरणो का सिंदूर लगाएॅ।

3. शनि की दशा Shani ki dasha में शुभ फलों की प्राप्ति हेतु काले घोड़े की नाल की अंगूठी बनाकर उसे दाएं हाथ की मध्यमा उंगली में पहनना चाहिए।

4. शनिवार के दिन शनि देव के मंदिर में सरसों का तेल और तांबा चढ़ाना चाहिए।

5. शनिवार के दिन लोहे के बर्तन में कड़वा तेल डालकर उसमें एक रूपया डालकर अपना चेहरा देखते हुए शनि का दान लेने वाले को दान दें ।

6. शनि दशा में महामृत्युंजय मंत्र का जाप रोज 108 बार करें। अथवा कम से कम 21 बार तो जरुर करें।

7. शनि की दशा shani ki dasha में रात्रि के समय कुत्ते को दूध पिलाएॅ, लेकिन स्वयं न पीएॅ।

8. शनि की दशा में शराब, माँस, मछली अण्डे आदि का सेवन न करें।

9. नित्य हनुमान जी के मन्त्र '' ओम् हुं हनुमतै रूद्रात्मकाय हुं फट'' का 108 बार जाप करें।

10. शनिवार को प्रांत: पीपल के पेड़ पर तिल मिश्रित मीठा जल चढ़ाकर धूप / अगरबत्ती जलाकर शनि देव मन्त्र का जाप करें एवं हनुमान चालीसा का पाठ करें । तत्पश्चात सात बार पीपल की परिक्रमा भी अवश्य ही करें ।

11. प्रत्येक शनिवार को संध्या के समय शनिदेव के मंदिर में जाकर उन पर कड़वा तेल चढ़ाते हुए उन पर गुड, काले तिल, काले उड़द ,लोहे की कील नीले फूल और काळा कपड़ा चढ़ाते हुए उनकी आरती करें एवं उनसे अपनी भूलो के लिए क्षमा मांगे ।

12. शनिवार संध्या को पीपल के नीचे कड़वे तेल का चौमुखा दीपक जलाएं ।

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