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भारत में भविष्य कथन की अनेकों पद्धतियां विद्यमान हैं। इन्हीं पद्धतियों में से एक है मनुष्य के अंगों और उसके लक्षण द्वारा भविष्य कथन करना। इस पद्धति का वर्णन "सामुद्रिक शास्त्र" में आता है।

क्या है सामुद्रिक शास्त्र? भविष्यपुराण के अनुसार भगवान कार्तिकेय ने एक ग्रंथ के रूप में लक्षण शास्त्र की रूपरेखा तैयार की थी। लेकिन इस ग्रंथ के पूरा होने से पहले ही भगवान शिव ने इसे समुद्र में फेंक दिया। जब शिव जी का गुस्सा शांत हुआ तो उन्होंने समुद्र से बचा हुआ कार्य पूरा करने को कहा और इस तरह इस शास्त्र को "सामुद्रिक शास्त्र" का नाम मिला।

तिल और उनका फलादेश

शरीर पर तिल का फलादेश

चेहरे पर तिल का फलादेश

अंग फड़कना (शरीर के लिए)

अंग फड़कना (चेहरे के लिए)

अंग फड़कना (नाक के लिए)

अंग फड़कना (कान के लिए)

अंग फड़कना (जांघ के लिए)

अंग फड़कना (आंखो के लिए)

अंग फड़कना (हाथ के लिए)

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