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हर माह के कृष्ण व शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि परमेश्वर शिव को समर्पित है। त्रयोदशी सभी प्रकार के दोषों का शमन करती है इसी कारण इसे प्रदोष कहते हैं। सूर्यास्त के बाद रात्रि के आने से पूर्व का समय प्रदोष काल कहलता है।

सर्वप्रथम प्रदोष का ज्ञान वेदव्यास जी ने महर्षि सूत को बताया था

मान्यतानुसार प्रदोष के समय महादेव कैलाश पर्वत के रजत भवन में नृत्य करते हैं और देवता उनके गुणों का स्तवन करते हैं।शास्त्रनुसार महादेव ने सती को प्रदोष का महत्व समझते हुए कहा था की कलियुग में प्रदोष ही धर्म, अर्थ, काम व मोक्ष का सबसे सटीक मार्ग होगा। सर्वप्रथम प्रदोष का ज्ञान वेदव्यास जी ने महर्षि सूत को बताया व गंगा तट पर सूतजी ने सौनकादि ऋषियों को प्रदोष का ज्ञान दिया था। प्रदोष का पूजन वार के अनुसार करने का शास्त्रों में विधान है। सोम प्रदोष के व्रत पूजन और उपाय से शत्रुओं पर जीत मिलती है व दुर्भाग्य दूर होता है महर्षि सूत अनुसार सोम प्रदोष व्रत करने से महादेव से सभी इच्छाओं की पूर्ति का वर मिलता है। मानसिक विकार दूर होते हैं तथा जमीन जायदाद में लाभ होता है।

ऐसे करें भोलेनाथ का पूजन

संध्या काल शिवालय जाकर सफेद शिवलिंग का विधि-वत पूजन करें। गौघृत का दीप करें, चंदन की अगरबत्ती जलाएं, सफेद कनेर के फूल चढ़ाएं, सफेद चंदन से त्रिपुंड बनाएं, रातरानी का इत्र चढ़ाएं, चावल की खीर का भोग लगाएं तथा इस विशेष मंत्र से का 1 माला जाप करें। पूजन के बाद भोग किसी गरीब कन्या को दे दें। पूजा का सुभ मुहूर्त 17:55 से शाम 18:55 तक है

इस मंत्र का जाप करना होगा लाभदायक

पूजा के बाद भोलेनाथ के 'श्रीं सोमेश्वराय नमः' मंत्र का जाप करना सुभ फलदायी होगा।

इन उपायो से होगा लाभ

संपत्ति में लाभ हेतु शिवलिंग पर चढ़े 4 काजू घर की वायव्य कोण में छुपाकर रखें। इच्छाओं की पूर्ति हेतु देवी शिवलिंग पर चढ़ा रातरानी का इत्र घर में छिड़कें। मानसिक विकार से मुक्ति हेतु सफेद कपड़े में बांधे अक्षत शिवलिंग पर चढ़ाएं।

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