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विवाह दो आत्माओं का मिलन है इसलिए दोनों की कुंडलियां दोनों के आचार-विचार व व्यवहार का आईना है।

कुंडली मिलान की परंपरा सदियों से चली आ रही है जिसका मुख्य उद्देश्य वर-वधू का एक दुसरे के साथ सामंजस्य बैठाना है ताकि वैवाहिक जीवन सुखद रहे। इस दृष्टिकोण से कुंडली मिलान काफी महत्वपूर्ण है। कुंडली मिलान भारतीय ज्योतिष विज्ञान में सफल विवाह हेतु लड़का और लड़की के अष्टकूट मिलान व मांगलिक दोष मिलान के आधार पर किया जाता है। जितने ज्यादा गुण मिलते हैं जोड़ी उतनी ही अच्छी बनती है। इसके अतिरिक्त यह भी देखा जाता है कि क्या लड़का-लड़की दोनों की जन्मपत्री में वैवाहिक सुख का अभाव तो नहीं है। अगर एैसा हो तो गुण मिलान निरर्थक हो जाता है। ज्योतिष शास्त्र के विद्वानों के अनुसार उपरोक्त सभी बातों का ध्यान रखकर मिलाई गयी कुंडलियों में संबंध विच्छेद अथवा तलाक की संभावना लगभग नहीं के बराबर होती है। कुंडली मिलान के समय यदि मिलान उत्तम हो परंतु उसमें हल्की-फुल्की त्रुटि रह जाये तो उसका उपाय विवाह से पूर्व ही कर लेने पर यह त्रुटि पूर्णरूपेण निष्प्रभावी हो जाती है।

कुंडली मिलान से क्या लाभ?

वर्षों के अनुभव के आधार पर ज्योतिषी कुंडली मिलान को सफल विवाह के लिए बेहद आवश्यक समझते हैं। अगर आप भी अपने प्रेमी/प्रेमिका से विवाह करने की सोच रहे हैं तो एक बार अपनी कुंडलियां अवश्य मिला लें।

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