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हमारे चारों तरफ ऐसी कई शक्तियाँ होती हैं, जो हमें दिखाई तो नहीं देतीं लेकिन समय-समय पर हम पर प्रतिकूल प्रभाव डालती रहती हैं, जिसकी वजह से हमारा जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है और हम एक सामान्य चल रहे जीवन से दिशाहीन हो जाते हैं।

जन्म के वक़्त मनुष्य अपनी कुंडली में बहुत सारे योगों को लेकर पैदा होता है। कुछ योग बहुत अच्छे होते हैं, तो कुछ खराब होते हैं और कुछ ऐसे भी होते हैं जो मिश्रित फल प्रदान करते हैं मतलब व्यक्ति के पास सारी सुख-सुविधाओं के होते हुए भी वह परेशान रहता है।

ऐसे में व्यक्ति अपने दुखों का कारण नहीं समझ पाता और ज्योतिष सलाह लेता है। ज्योतिष उस व्यक्ति की कुंडली का पूर्ण रूप से अध्ययन करता है तब उसे पता चलता है कि उसकी कुंडली में किसी प्रकार का दोष है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्म कुंडली में अनेक प्रकार के शापित योग हो सकते हैं। काल सर्प योग भी इन्हीं दोषों में से एक है।

कालसर्प योग कारण लक्षण उपाय

काल सर्प योग एक ऐसा योग होता है जो जातक द्वारा उसके पूर्व जन्म में किये गए किसी जघन्य अपराध के शाप या दंड के रूप में उसकी जन्म कुंडली में परिलिक्षित होता है। इसीलिए ज्योतिष आदि में विश्वास रखने वाले हर मनुष्य को काल सर्प योग कारण लक्षण उपाय की जानकारी होनी चाहिए।

ऐसी दशा में व्यक्ति शरीरिक और आर्थिक रूप से परेशान हो जाता है। इसके साथ-साथ उसे संतान संबंधी कष्ट भी होते हैं मतलब या तो वो संतानहीन रहता है या फिर यदि संतान हो जाये तो वह बहुत ही कमज़ोर और रोगी होती है। आर्थिक रूप से भी उसकी रोज़ी-रोटी बहुत मुश्किल से चल पाती है। यदि बालक धनाढय घर में पैदा हुआ है फिर भी उसको आर्थिक क्षति का सामना कारण पड़ता है। न केवल आर्थिक बल्कि उस बालक को तरह-तरह की स्वास्थ समस्याएं होते रहती हैं।

कुंडली में काल सर्प योग का पता चलते ही व्यक्ति को भयभीत होने की बजाय उचित ज्योतिषीय सलाह ले कर इसके निवारण या प्रभाव को कम करने का तरीका जानना चाहिए।

कालसर्प दोष निवारण पूजा

यदि किसी जातक के लिए काल सर्प योग का प्रभाव बेहद अनिष्टकारी हो तो उसे दूर करने के लिए विभिन्न तरह के उपाय भी किये जा सकते हैं। हमारे ज्योतिष शास्त्रों में ऐसे सारे उपायों के बारे में बताया गया है, जिनके द्वारा हर तरह की ग्रह -बाधाएं व दोषों को शांत किया जा सकता है।

आईये जानते हैं काल सर्प योग दूर करने के कुछ आसान उपाय -

· इस दोष को दूर करने के लिए शिवलिंग पर प्रतिदिन जल चढ़ाना चाहिए।

यदि पति-पत्नी के बीच निजी ज़िन्दगी में क्लेश हो रहा हो, तो आप भगवान श्रीकृष्ण या बाल गोपाल की मूर्ति जिसमें उन्होंने सिर पर मोरपंख वाला मुकुट धारण किया हो वैसी प्रतिमा को अपने घर में स्थापित कर प्रति‍दिन उनकी पूजा-अर्चना करें। साथ ही ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय या ऊँ नमो वासुदेवाय कृष्णाय नम: शिवाय मंत्र का जाप करे। ऐसा नियमित रूप से करने से कालसर्प दोष की शांति होगी।

· इस योग में महामृत्युंजय मंत्र का जप करना अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है। इस मंत्र की प्रतिदिन एक माला करने से लाभ मिलता है।

· भगवान शिव का रुद्राभिषेक करने से शिव जल्द प्रसन्न हो करेंगे दोष को दूर।

· नागपंचमी का व्रत करें और नाग देव की उपासना करें।

· प्रतिदिन पक्षियों को दाना डालने से दोष का प्रभाव कम हो जाता है।

· समुद्री फैन और समुद्र से निकलने वाले पत्थर और मोती आदि को अपने घर में रखें।

· दक्षिणावर्ती शंख को अपने निवास स्थान पर मंदिर के स्थान पर रखें। रखने से पहले एक थाल में चावल भरें और साथ ही शंख को भी चावलों से भरकर पूजा स्थल के पास रख दें।

· मोर के पंख से स्वयं को झाड़ा करें, ध्यान रखें कि अपने शरीर पर झाड़ा ऊपर से नीचे की ओर ही लगाएं। शनिवार को पीपल के वृक्ष की पूजा करें।

नारियल के गोले में सात प्रकार का अनाज, उड़द की दाल,गुड़, और सरसों भर लें। अब उसे बहते हुए पानी या फिर नाले आदि के गंदे पानी में बहा दें। ऐसा करने से आपका चिड़चिड़ापन दूर हो जायेगा। इस प्रयोग को आप राहूकाल के समय करें।

· शिवलिंग पर चांदी से बना नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ाए।

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