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जातक के स्वास्थ्य व आरोग्यता का विचार करने हेतु प्रथम भाव तथा सूर्य की स्थिति का अध्ययन किया जाता है क्योंकि प्रथम भाव से शरीर का तथा सूर्य जो इस भाव का कारक है आपकी आरोग्य शक्ति का मुख्य पैमाना है। इसीलिए आरोग्यता प्राप्ति के लिए हिंदू शास्त्र ग्रंथों में सूर्य की पूजा तथा सूर्य को अघ्र्य देने की परंपरा है। कुंडली के छठे भाव से रोग का तथा अष्टम भाव से आयु का विचार किया जाता है। कुंडली में जो ग्रह अशुभ, नीच अथवा शत्रु राशिस्थ होकर अशुभ भावों में स्थित होकर पाप ग्रहों से दृष्ट हो जाता है वह रोग का मुख्य कारण उत्पन्न करता है। स्वास्थ्य संबंधी विस्तृत विश्लेषण प्राप्त करने हेतु इस रिपोर्ट के लिंक पर क्लिक करें।

आरोग्य विश्लेषण रिपोर्ट के लाभ :

इस आरोग्य विश्लेषण रिपोर्ट के माध्यम से यह जानें कि आपका स्वास्थ्य कितना अनुकूल रहेगा।

आपके लिए कौन सी स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं संभावित हैं?

क्या वर्तमान समय में आपका स्वास्थ्य अनुकूल बना रहेगा?

क्या आपके लिए निकट भविष्य में रोग की?

रोग से कब मुक्ति मिलेगी?

कौन सा उपाय आरोग्यता को बढ़ायेगा?

क्या किसी विशेष पूजा की आवश्यकता है?

कौन सा रत्न धारण करने से आरोग्यता लाभ होगा?

कौन से अनाज का दान करने से रोगों का उन्मूलन होगा?

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