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1. घर में हवा और प्राकृतिक रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए।

2. शयनकक्ष की व्यवस्था इस तरह होनी चाहिए कि सोते समय पांव उत्तर और सर दक्षिण दिशा में हो।

3. टॉयलेट हमेशा पश्चिम दिशा में बनाना चाहिए।

4. घर में पूजा स्थल बनाना हो तो वह उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। घर में पूजा स्थल तो होना चाहिए लेकिन शिवालय नहीं। आप चाहें तो शिवजी की मूर्ति अवश्य रख सकते हैं।

5. घर के ठीक सामने कोई पेड़, नल या पानी की टंकी नहीं होनी चाहिए। ऐसी चीजों की वजह से घर में सकारात्मक शक्तियों के आगमन में परेशानी आती है।

6. मकान की छत पर बेकार या टूटे-फूटे समान को न रखें। घर की छत को हमेशा साफ रखें।

7. घर के सामने अगर कोई फलदार पेड़ जैसे केला, पपीता या अनार आदि है तो उसे कभी सूखने ना दें, अगर यह सूख रहा है या फल नहीं दे रहा तो घर के जातकों को संतानोत्पत्ति में समस्या या बांझपन से जूझना पड़ सकता है। घर के सामने छोटे फूलदार पौधे लगाना शुभ होता है।

8. घर में बच्चों का कमरा उत्तर– पूर्व दिशा में होना चाहिए। अगर बच्चों के पढ़ने का कमरा अलग है तो वह दक्षिण दिशा में होना चाहिए। पढ़ाई के कमरे में देवी सरस्वती की तस्वीर या मूर्ति लगाई जा सकती है। बच्चों के कमरे की दीवारों का रंग हल्का होना चाहिए।

9. वास्तु शास्त्र के अनुसार खाना खाते समय हमारा मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में होना चाहिए। ये दिशा सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती हैं।

10. घर में फ्रिज दक्षिण- पूर्व दिशा में रखना शुभ होता है।

11. शयनकक्ष (सोने का कमरा) कभी भी दक्षिण- पूर्व दिशा में नहीं होना चाहिए। शयन कक्ष में दर्पण नहीं लगाना चाहिए, यह संबंधों में दरार पैदा कर सकता है। शयनकक्ष या बेडरूम में लकड़ी के बने पलंग रखने चाहिए।

12. ज्योतिष विद्या के अनुसार सोते समय जातक के पैर दरवाजे की तरफ नहीं होने चाहिए।

13. कभी भी बेडरूम में मंदिर नहीं लगाना चाहिए। लेकिन साज- श्रृंगार का सामान या किसी तरह का वाद्य यंत्र शयनकक्ष में रखा जा सकता है। बेडरूम की दीवारों के लिए सफेद, जामुनी, नीला या गुलाबी रंग बहुत ही अच्छा माना जाता है।

14. झूठे या गंदे बर्तन वॉश बेसिन में रात को नहीं छोड़ने चाहिए। अगर हो सके तो सुबह और शाम के समय भोजन बनाने से पहले किचन (रसोईघर) में धूप- दीप अवश्य दिखाना चाहिए। लेकिन याद रखें किचन में पूजा स्थान बनाना शुभ नहीं होता।

15. बेडरुम में आइने को उत्तर- पश्चिम दिशा में लगाना चाहिए। ध्यान रखें आइना ज्यादा बड़े आकार का ना हो।

16. मकान में भारी सामान दक्षिण, पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखने चाहिए। हल्के सामान उत्तर,पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में रखे जाने चाहिए। घर में कांटेदार पौधे नहीं लगाने चाहिए। लेकिन फेंगशुई पौधे जैसे मनी प्लांट या बांस लगा सकते हैं।

17. घर में मौजूद किसी भी प्रकार के वास्तु दोष को समाप्त करने के लिए वास्तु दोष निवारक यंत्र का प्रयोग किया जा सकता है। इस यंत्र की स्थापना पंडित या पुरोहित से की करवानी चाहिए। इसके अलावा स्वस्तिक, मुस्लिम संप्रदाय का 786 या ईसाई संप्रदाय के क्रास का चिह्न घर के मुख्य द्वार पर अंकित करने से सभी तरह के वास्तु दोष खत्म हो जाते हैं।

18. घर में महाभारत या कब्रिस्तान से जुड़ी किसी भी तस्वीर को घर में नहीं लगाना चाहिए। हालांकि कृष्ण लीलाओं जैसे बांसुरी बजाते कृष्ण और राधा का चित्र या यशोदा- कृष्ण की तस्वीर घर में लगाई जा सकती है।

19. घर का मध्य भाग ब्रह्मस्थान कहलाता है। इसे खाली और हमेशा स्वच्छ रखना चाहिए।

20. वास्तु शास्त्र के अनुसार टॉयलेट और बाथरूम अलग-अलग होने चाहिए। यदि स्नानघर व शौचालय एक साथ हैं, तो स्नानघर में एक कांच की कटोरी में साबुत नमक भरकर रखें और हर सप्ताह इसे बदलते रहें। नमक नकारात्मक ऊर्जा का नाश करता है।

21. तिजोरी को शयनकक्ष (सोने का कमरा) के दक्षिण- पश्चिम भाग में रखने से जातक को सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

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